मैं और मेरा जीवन

मैं भंवरे की गुंजन में जीता हूं ,
भोर पत्तियों की ओस पीता हूं,
मेघ से गिरता रहा हूं बूंदों में,
भावों सा उमड जाता क्षणों में,
बिखर मुस्कान पर बसता हूं,
खिलते फूलों सा हंसता हूं,
पीडा से सिसक रोता हूं
नयनों के ढले अश्रु पीता हूं
नवजात मातृत्व का वात्सल्यित हर्ष
प्रथम संतति का प्रथम दर्श
पति के नयनों में पत्नि ॠण
एक और बंधन से दाम्पत्य दृण
जीवन के इस क्षण में जीता हूं
मैं हूं सुर शिशु के प्रथम कृन्दन का, आवेग जीव में सन्चरित हृद्स्पन्दन का ।
चिपते प्रेमियों की दबी चोर पद्चाप, कांपते होठों की सिहरन का आलाप ।
अन्जुलि भरे चेहरे में डूब तलाशती, नयनों की परछाई का विश्वास ।
धडकन ताल की जुगलबंदी में, एक सप्तक सी सुरीली उच्छवास ।
दूर मत ढून्ढो मुझे मैं हूं तुम्हारे पास,
तुम में, तुम्हारे अस्तित्व का आभास ।

