Friday, June 15, 2007

तुम

मैं रहा जितना भी दूर तुमसे.
तुम हरदम मेरे पास थी.
खुशियों में हंसी थी खुलकर.
कभी मेरे संग उदास थी.
अंधेरे में किरण रोशनी की.
नम आंखों की बरसात थी.
परेशानियों में कांधा थी मेरा.
मेरी गर्दिशों में उपवास थी.
मेरे डगमगाते आत्म-विश्वास को
थामता एक विश्वास थी.

1 Comments:

Blogger laveena rastoggi said...

Meri gardishon me upvaas thi....kitni sunder upma hai...

7:25 AM  

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