तुम
मैं रहा जितना भी दूर तुमसे.
तुम हरदम मेरे पास थी.
खुशियों में हंसी थी खुलकर.
कभी मेरे संग उदास थी.
अंधेरे में किरण रोशनी की.
नम आंखों की बरसात थी.
परेशानियों में कांधा थी मेरा.
मेरी गर्दिशों में उपवास थी.
मेरे डगमगाते आत्म-विश्वास को
थामता एक विश्वास थी.
तुम हरदम मेरे पास थी.
खुशियों में हंसी थी खुलकर.
कभी मेरे संग उदास थी.
अंधेरे में किरण रोशनी की.
नम आंखों की बरसात थी.
परेशानियों में कांधा थी मेरा.
मेरी गर्दिशों में उपवास थी.
मेरे डगमगाते आत्म-विश्वास को
थामता एक विश्वास थी.

1 Comments:
Meri gardishon me upvaas thi....kitni sunder upma hai...
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